शिक्षक की सेवानिवृत्ति तो सेवा की शुरुआत, अंत नहीं – प्राचार्य खेमचंद मेड़ा

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शिक्षक की सेवानिवृत्ति तो सेवा की शुरुआत, अंत नहीं – प्राचार्य खेमचंद मेड़ा

नीलिमा डाबी

थांदला – सेवानिवृत्ति किसी शिक्षक की सेवा का अंत नहीं, बल्कि इस सेवा की शुरुआत होती है शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद हमें समाज और राष्ट्र उत्थान में अपने समय को समर्पित कर ही देना चाहिए मिडिल स्कूल देवीगढ़ में सेवानिवृत्त अब्दुल सलाम के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह में प्रार्चाय खेमचंद मेड़ा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में तो प्राचीन समय से ही वानप्रस्थ आश्रम का उल्लेख मिलता है जिसमें व्यक्ति अपने अनुभव को समाज के आने वाली पीढियों को देने का प्रयास करता है कहा कि सभी को समय के साथ सेवा से मुक्त होना ही पड़ता है सबके बीच हमारा व्यवहार और व्यक्तित्व ही रह जाता है स्कूल के शिक्षकों ने अब्दुल सलाम खान को कई उपहार देकर उन्हें विदा किया इसके पहले उन्हें फूलमालाओं से स्वागत कर आशीर्वाद लिया पूर्व प्राचार्य डी के उपाध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक तो कभी रिटायर्ड नहीं होते हैं सेवानिवृत्ति के बाद समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हमारे समाज में शिक्षक के रूप में गुरु का स्थान सर्वोपरि है हमें सभी शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए। शिक्षक समाज सुधारक होते हैं, जो अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों को देश के भविष्य निर्माण के लिए गुजार देता है मौके पर प्राचार्य खींमचन मेड़ा प्रधान अध्यापक हीरालाल चौहान पूर्व प्राचार्य डीके उपाध्याय सत्येंद्र सिंह राठौड़ आदि मौजूद थे।

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