नवपद ओलिजी के प्रारंभिक चरण में 47 आराधक जुड़े 1 लाख महामंत्र नवकार की विशिष्ट आराधना में 100 से अधिक आराधक हुए शामिल

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नवपद ओलिजी के प्रारंभिक चरण में 47 आराधक जुड़े

1 लाख महामंत्र नवकार की विशिष्ट आराधना में 100 से अधिक आराधक हुए शामिल

प्रियांश डाबी थांदला से

थांदला। चैत्र सुदी नवरात्रि के दौरान सप्तमी से जैन आराधकों की विशिष्ट नवपद ओलिजी की आराधना शुरू हो जाती है जिसमें आराधक नौ दिवस तक केवल एक समय विगय रहित उबला हुआ आहार ग्रहण करते हुए अपने आराध्य महामंत्र नवकार के पाँच पद व ज्ञान-दर्शन-चारित्र-तप की क्रमशः प्रतिदिन एक-एक पद की आराधना करते है। थांदला श्रीसंघ में सामूहिक आराधना के भव्य माहौल में नवपद आराधना की जानकारी देते हुए संयोजक लता सोनी व सचिव हितेश शाहजी ने बताया कि इस बार थांदला में चल रहे 92 वर्षितप आराधकों के बीच 10 आराधकों ने वरण, आयम्बिल व मात्र उड़द द्रव्य का उपयोग कर मात्र एक समय अलुणा विगय (दूध, दही, घी, तेल, शक्कर) रहित बफा हुआ आहार करते हुए व 37 आराधकों ने निवि तप से उक्त द्रव्य में केवल नमक व काली मिर्च का आगार रखते हुए महामंत्र के पहले पद रूप अरिहंत देव की आराधना की। सभी आराधकों के आयम्बिल, निवि आदि विविध तप करवाने के लाभार्थी थांदला विराजित सरलमना माताजी पूज्या महासती श्री दिव्यशीलाजी म.सा. की सांसारिक बड़ी बहन श्रीमती श्रीकांता भंवरलाल बांठिया परिवार (बैंगलोर) ने लिया है। श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने बताया कि सभी आराधकों की आराधना निर्विघ्न सम्पन्न हो इसके लिए थांदला संघ के प्रत्येक परिवार की एक दिन सहभागिता निश्चित की गई है। आज प्रथम दिवस पर शाहजी व मेहता परिवार के सदस्यों ने लाभार्थी परिवार के साथ मिलकर अपनी सेवाएँ प्रदान की।

*1 लाख महामंत्र के सामूहिक जाप की विशिष्ट आराधना सम्पन्न*

जैनाचार्य जिन शासन गौरव पूज्य गरूदेव उमेशमुनिजी “अणु “की दिव्य कृपादृष्टि व बुद्धपुत्र प्रवर्तक देव श्री जिनेन्द्रमुनिजी आशीर्वाद से थांदला विराजित उनकी आज्ञानुवर्ती महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा – 4 की पावन प्रेरणा से नवपद ओलिजी के प्रारंभ दिवस पर संघ में प्रातः 9 से 11 बजे तक एक साथ 100 आरधक मिलकर जैन आराध्य महामंत्र नवकार के 1 लाख जाप किये। जानकारी देते हुए महिला मंडल अध्यक्ष किरण श्रीश्रीमाल, सचिव अर्चना गादिया व कोषाध्यक्ष सीमा चौरड़िया ने बताया कि जैन साधकों में दर्शन शुद्धि के लिये महामंत्र नवकार की आराधना विशेष कल्याणकारी होती है जिसके द्वारा आराधक अपने सम्पूर्ण कर्म क्षय कर स्वयं ही नवकार पद में समा जाता है ऐसी महा फलदायी आराधना सकल विश्व में जैन ही नही जेनेत्तर बंधु भी पूर्ण आस्था के साथ करते है। थांदला में पूज्या महासतियों के सानिध्य में 100 से अधिक श्रावक – श्राविकाओं द्वारा सामायिक में रहकर नवकार महामंत्र की 10 – 10 माला मौन पूर्वक गिनी गई जिन्हें गुप्त लाभार्थी परिवार द्वारा प्रभावना प्रदान की गई।

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