पूज्य श्री रुपेन्द्रमुनिजी म.सा. की 26 वीं पुण्यतिथि पर सामूहिक एकासन तप के साथ गुणानुवाद सभा का आयोजन श्रमण संघ के साहसिक सलाहकार थे करुणामूर्ति – संयतमुनिजी
पूज्य श्री रुपेन्द्रमुनिजी म.सा. की 26 वीं पुण्यतिथि पर सामूहिक एकासन तप के साथ गुणानुवाद सभा का आयोजन
श्रमण संघ के साहसिक सलाहकार थे करुणामूर्ति – संयतमुनिजी
निलिमा डाबी
थांदला। महापुरुषों का जीवन हमें उनकी गुण सौरभ ग्रहण कर उन्नति मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। ऐसे ही सरल व सादगी से संयम जीवन यापन करते हुए श्रमण संघीय सलाहकार रहे करूणामूर्ति पूज्य श्री रुपेन्द्रमुनिजी म.सा. ने अनेक आदर्श उपस्थित किये। आपकी कृपा व प्रेरणा से आपके लघु गुरुभ्राता जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. ने आपके रहते प्रवर्तक पद ग्रहण किया व उसका कुशलता से संचालन भी किया। आपको संस्कार गर्भ से ही मिले यह कहने में भी कोई अतिरेक नही है। पिता के पूर्व में अवसान होने के बाद व आपके बड़े भ्राता सुरेन्द्रमुनिजी के संयम लेने के बाद आप ने अपनी माता गेंदीबाई, बहन कमलामताजी व मासी की लड़की चांदकुंवर जी ने एक साथ दीक्षा ग्रहण की। आप अपने गुरु कविवर्य प्रवर्तक पूज्य श्री सूर्यमुनिजी म.सा. के अति विश्वासपात्र संत रहे उसका प्रमुख कारण आपके जीवन में कभी अहंकार भाव नही आये व अपने से छोटे गुरुभ्राता पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. “अणु” की प्रसिद्धि देखकर ही कभी हृदय में ईर्ष्या ने जन्म लिया। यही नही सभी गुरुभ्राताओं में आपसी प्रेम भी इतना था कि कभी किसी भी बात पर कोई विरोध भी देखने को मिला उक्त गुणानुवाद अणु वत्स पूज्य श्री संयतमुनिजी म.सा. ने विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहे। पूज्य श्री ने कहा कि उनकी कृपा से ही मैने प्रवचन देने की शुरुआत की व उनकी कृपा से ही मेरे संयम जीवन मे दृढ़ता आयी। अणुवत्स ने उनके शारीरिक पक्षघात रोग का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी असहाय वेदना को मैनें निकटता से देखा है वे ऐसे में भी आनन्दित थे व रोग को वेदनीय कर्म का उदय मान कर अपूर्व धैर्य से भोगते रहे। वर्ष 1997 में थांदला चातुर्मास के बाद भी 3 माह तक थांदला में विराजने के बाद वर्ष 1998 के झाबुआ वर्षावास के दौरान आज के दिन पूज्य श्री ने अपने इस नश्वर देह का त्याग किया। पूज्य श्री का सम्पूर्ण जीवन प्रेरणादायक रहा है आपकी छोटे सन्तों के प्रति वात्सल्यता व सेवा भी अनूठी रही। धर्म सभा में आपने पाप कर्मों का विवेचन करते हुए कहा कि कृत पापों की वजह से जीव संसार में भटक रहा है जीव यहाँ भी अठारह प्रकार से क्रियामाण पाप कर रहा है जिससे उसका संसार बढ़ ही रहा है इसलिए उसे इससे निवृत्ति लेने की आवश्यकता है। पूज्यश्री ने कहा कि जीव जब तक संसार में है तब तक उसे चाहते हुए व न चाहते हुए भी पाप करना ही पड़ते है इससे वह बच नही सकता इससे बचने के लिए जीव को संयम मार्ग पर प्रविष्ठ होना ही पड़ेगा तभी वह पाप कर्म से बच सकता है व धर्म मार्ग पर अग्रसर हो कर एक दिन संसार से मुक्त भी हो सकेगा। धर्म सभा में ओजस्वी वक्ता पूज्य श्री आदित्य मुनिजी ने कहा कि जीव ने माया व वक्रता से अपना ही नुकसान किया है आज वह जहाँ खड़ा है इस माया व वक्रता से उसकी गति बिगड़ रही है। जीव को धर्म अच्छा नही लगता जबकि पाप में रमणता उसे माया व वक्र बनाती है यदि वह ऐसा ही करता रहेगा तो अधम गति का मेहमान बन जायेगा। पूज्यश्री ने कहा कि जीव जब पाप भीरू बनेगा तभी धर्म का पात्र बन पाएगा व इस संसार परिभ्रमण से मुक्त भी हो पायेगा। गुरुदेव के पुण्य स्मरण करते हुए 100 से अधिक तपस्वियों ने सामूहिक एकासन तप की आराधना की जिसकी व्यस्वथा श्रीसंघ द्वारा स्थानीय महावीर भवन पर की गई। गुरुदेव की पुन्यस्मृति में अन्य श्रावक – श्राविकाओं ने 11-11 सामायिक की आराधना की जिसकी प्रभावना का लाभ शांताबाई नाकुसेठ परिवार ने लिया।
गुजरात मध्यप्रदेश के श्रद्धालुओं ने आकर गुरुदेव से क्षमायाचना की
क्षमा प्रधान जैन धर्म में संवत्सरी महापर्व के बाद अनेक श्रावक – श्राविकाओं द्वारा गुरुभगवंतों के पास जाकर उनसे भी वार्षिक क्षमायाचना की जाती है। इसी क्रम में आज गुजरात प्रान्त के लिमड़ी, दाहोद मध्यप्रदेश प्रान्त के रतलाम, बड़वाह, झाबुआ, इंदौर आदि अन्य स्थानों के श्रावक श्राविकाओं ने आकर संयत गुरुवर सहित विराजित संत मण्डल व निखिलशीलाजी आदि साध्वी मण्डल के साथ स्थानीय संघ से क्षमायाचना की। इस अवसर पर रतलाम से सौरभ मूणत ने व लिमड़ी के दीपेश भाई श्रीमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए संघरूप में सामूहिक क्षमायाचना की। धर्म सभा का संचालन संघ सचिव प्रदीप गादिया ने किया उक्त जानकारी संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने दी। इस अवसर पर 71 वर्षीतप आराधकों के सामूहिक पारणें भी संघ द्वारा करवाये गए जिसका लाभ सचिन प्रकाशचंद्र बोथरा परिवार ने लिया।
जैनम ग्रुप का 96वाँ रविवारीय शिविर सम्पन्न
थांदला में जैनम ग्रुप 12 से 20 वर्ष के बच्चों का एवं श्री महावीर जैन पाठशाला के बच्चों का रविवारीय शिविर विराजित अणुवत्स पुज्यश्री संयतमुनिजीजी म.सा. आदि ठाणा – 4 व पूज्य श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा – 4 के पावन सानिध्य में रविवार दोपहर 02.00 से 03.00 तक स्थानीय पौषध भवन (स्थानक) पर आयोजित किया जा रहा है। जानकारी देते हुए शिविर व पाठशाला संचालिका अनुपमा श्रीश्रीमाल, प्रिया व्होरा ने बताया कि आज जिसके अंतर्गत आज रविवार को 96 वाँ शिविर आयोजित किया गया जिसमें करीब 50 बच्चों ने धर्म आराधना का लाभ लिया। रमेशचंद्र सवाईसिंहजी शाहजी परिवार द्वारा सभी शिविरार्थी बच्चों को प्रभावना व स्वल्पाहार का लाभ लिया गया।