*झाबुआ धर्मप्रांत में कैथोलिक समुदाय ने पवित्र बृहस्पतिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया*
प्रियांश डाबी झाबुआ से
आदिवासी महिला दबंग पत्रकार नीलिमा डाबी झाबुआ न्यूज़.कॉम
प्रभु यीशु के प्रेम, सेवा और बलिदान की स्मृति में आयोजित हुई विशेष धर्मविधियाँ
झाबुआ, मध्य प्रदेश – झाबुआ धर्मप्रांत के अंतर्गत आने वाले सभी गिरजाघरों एवं प्रार्थना स्थलों में 17 अप्रैल को पवित्र बृहस्पतिवार (Holy Thursday) को गहन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। यह दिन ईसाई धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन प्रभु यीशु मसीह ने दो महान कार्य किए: पवित्र युख्रीस्त (Holy Eucharist) की स्थापना और अपने शिष्यों के पाँव धोकर सेवा और विनम्रता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
पवित्र युख्रीस्त की स्थापना: इस दिन को ‘अंतिम भोज’ (Last Supper) की स्मृति में मनाया जाता है, जब प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों के साथ बैठकर रोटी और दाखरस को अपने शरीर और रक्त के रूप में प्रस्तुत किया। इसी घटना के माध्यम से उन्होंने युख्रीस्त नामक पवित्र संस्कार की स्थापना की, जिसे आज भी प्रत्येक पवित्र मिस्सा (Holy Mass) में पुनः अनुभव किया जाता है। यह संस्कार कैथोलिक विश्वास का केंद्रबिंदु है, जो ईश्वर के साथ गहरे संबंध और विश्वासियों के आपसी एकता को दर्शाता है।
पाँव धोने की परंपरा: पवित्र बृहस्पतिवार की दूसरी महान स्मृति है जब यीशु मसीह ने अपने बारह शिष्यों के पाँव धोए। उन्होंने कहा, “मैं गुरु होकर भी तुम्हारे पाँव धो रहा हूँ, तो तुम भी एक-दूसरे की सेवा करो और प्रेम बाँटो।” यह कार्य उन्होंने विनम्रता, सेवा और आपसी प्रेम की सीख देने के लिए किया। इस परंपरा को निभाते हुए झाबुआ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर खराड़ी ने राणापुर में आयोजित पवित्र मिस्सा के दौरान प्रतीकात्मक रूप से 12 लोगों के पाँव धोए। यह दृश्य वहां उपस्थित सभी विश्वासियों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।
धर्माध्यक्ष पीटर खराड़ी ने अपने प्रवचन में कहा कि “यीशु मसीह ने हमें यह सिखाया कि सच्चा नेता वह है जो सबसे पहले सेवा करता है। हमें भी उनकी तरह विनम्र बनना है, दूसरों के प्रति प्रेम, दया और सेवा का भाव रखना है। यह दिन हमें एकजुट होकर एक-दूसरे की देखभाल करने और ईश्वर के प्रेम को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।”
झाबुआ धर्मप्रांत के सभी परगनों में इस अवसर पर विशेष प्रार्थना सभाएँ, मिस्सा बलिदान अर्पित किए गए। सैकड़ों की संख्या में विश्वासी इन धर्मविधियों में सम्मिलित हुए। श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु के बलिदान और प्रेम को याद करते हुए उपवास, प्रार्थना और आत्मचिंतन के माध्यम से दिन बिताया।
पवित्र बृहस्पतिवार का यह आयोजन न केवल धार्मिक कर्तव्यों की पूर्ति था, बल्कि यह ईश्वर और समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को पुनः स्मरण करने का अवसर भी था। धर्मप्रांत में मनाया गया यह पर्व सभी विश्वासियों को प्रेम, सेवा और एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।