सांसद अनीता चौहान, गजेंद्र सिंह पटेल और ज्ञानेश्वर पाटिल आए शिक्षकों के समर्थन में सांसदों द्वारा पत्र लिखने के साथ ही संसद भवन तक गूंजी आवाज

0
IMG-20260327-WA0500(3)
Spread the love

सांसद अनीता चौहान, गजेंद्र सिंह पटेल और ज्ञानेश्वर पाटिल आए शिक्षकों के समर्थन में

सांसदों द्वारा पत्र लिखने के साथ ही संसद भवन तक गूंजी आवाज

प्रियांश डाबी झाबुआ से

झाबुआ। झाबुआ- रतलाम लोकसभा क्षेत्र की सांसद अनीता चौहान और लोकसभा क्षेत्र खरगोन- बड़वानी के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल और खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल शिक्षक पात्रता परीक्षा से प्रभावित राज्य के शिक्षकों के पक्ष में आए हैं। जहां सांसद श्रीमती चौहान ने संसद भवन में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर सवाल उठाया है। वहीं सांसद गजेंद्र सिंह पटेल और ज्ञानेश्वर पाटिल ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की है।

पांच जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीन सांसदों का शिक्षकों के समर्थन में आने पर मप्र ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर मंडला, प्रदेश मीडिया प्रभारी इरफान मंसूरी धार, प्रदेश महासचिव मनीष पवार झाबुआ, प्रदेश सचिव हेमेंद्र मालवीय बड़वानी आदि ने स्वागत किया है और माननीय सांसदों का आभार माना है।

चिंताग्रस्त शिक्षकों का मनोबल कमजोर हो रहा है: अनीता चौहान

झाबुआ- रतलाम सांसद अनीता चौहान ने संसद भवन में टीईटी को लेकर प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार आरटीई के तहत 20-25 वर्षों से कार्य कर रहे हैं शिक्षकों से दोबारा योग्यता परीक्षा लेने की बात सामने आई है। जबकि उनके पास वर्षो का अच्छा अनुभव है। ऐसे में फिर से शिक्षक पात्रता परीक्षा लेने से उनके मन में चिंता और दबाव बन रहा है। इस निर्णय से शिक्षकों का मनोबल कमजोर हो रहा है। मान्यवर सभापति जी मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहती हूं कि इस विषय पर पुनर्विचार किया जाए।

आरटीई लागू होने के बाद नियुक्त शिक्षकों की परीक्षा ली जाना विधि सम्मत नहीं है: गजेंद्र सिंह पटेल

खरगोन -बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान एवं मुख्यमंत्री डॉ यादव को पत्र लिखकर कहा कि
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति एनसीटीई अधिनियम 2001 के अनुसार की गई, जिसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा कोई प्रावधान नहीं था। आरटीई अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य नहीं थी। तत्कालीन समय की वैध न्यूनतम योग्यता के आधार पर नियुक्ति की गई थी। शिक्षक पात्रता परीक्षा संबंधी नियम वर्ष 2010 से प्रभावी हुआ है। इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू किया जाना विधि सम्मत नहीं है। वर्तमान में लागू शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता मापदंडों में परिवर्तन के कारण अनेक शिक्षक अपात्र हो सकते हैं, जिससे उनकी सेवा समाप्ति की स्थिति निर्मित हो जाएगी। जो कि उनके स्वयं एवं परिवार के साथ अन्याय होगा। उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत में रखते हुए मध्य प्रदेश राज्य में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता में राहत दिए जाने का अनुरोध है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *